Wednesday, June 11, 2014

मेरे प्रेम मैं हार गया तुमसे - वीरू सोनकर

मेरे प्रेम
मैं हार गया तुमसे
तुम किसी रक्त बीज से पनपे हो मुझमे
बिलकुल बेशर्मो से,
हर बार
मेरी कुरूपता का उपहास उड़वा कर
तुम कुछ दिनों के लिए सो जाते हो
और मुझे छोड़ देते हो
अपने इस कुरूप चेहरे पर रोने के लिए
मेरे प्रेम
जब तुम सो जाते हो
तब मुझे लगता हैं की तुम मर गए
पर तुम कभी नहीं मरते,
हर बार
कभी किसी बाजार में घूमते हुए
या किसी कॉलेज के बाहर से गुजरते हुए
सुन्दर चेहरों की मुस्कुराहटो में
तुम
अपने छिछोरेपन के साथ उठ खड़े होते हो
और
बहुत ही नाजायज तरीके से
तुम अपने
इस बार के प्रेम को भी
सच्चा और रूहानी बताते हो.........
मेरे प्रेम
मैं तुम्हे बताता हूँ
तुम प्रेम नहीं हो
तुम वासना हो !!
मेरे प्रेम
तुम्हे तो याद भी नहीं होगा
मेरा असली और
पहला प्रेम / जब तुमको ये जानने में ही
सालो लग गए थे की ये ही प्रेम हैं.....
अब उस पहले प्रेम के बाद
मेरे भीतर सिसक सिसक कर दम तोड़ने के बाद
तुम बार बार
मुझमे
जो जी जाते हो
जान लो,
मुझे अब तुम्हारी साजिशे पता हैं
अब मुझसे पहले सा प्रेम नहीं होगा.....सुन लो
मैं वासना को
प्रेम का नाम नहीं दूंगा
मेरे प्रेम
तुम मुझमे मर चुके हो........
अब किसी अतृप्त आत्मा जैसा व्यवहार न करो

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