Thursday, June 26, 2014

पुष्प को बगिया में खिलने की आस है - रेखा जोशी

पुष्प को बगिया में खिलने की आस है
बसंत भी तो पतझड़ के आस पास है

बगिया वीरान है बिन तेरेअब सजन
धैर्य रख मधुमास भी तो आस पास है

अँगना तेरे मुस्कुराये गी धूप भी
खिलखिलाते फूल भी तो आस पास है

पोंछ ले आँसू आँखों से तुम अपने
बहार फूलो की भी तो आस पास है

न उदास हो अब तो ज़िंदगी तू मुझसे
गुनगुनाती खुशियाँ यहॉँ आस पास है

1 comment:

  1. मेरी रचना को मान देने के लिए सादर आभार आपका 🙏 🙏

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