Thursday, September 25, 2014

इंच - इंच सरक रहा है - मणि मोहन मेहता

इंच - इंच सरक रहा है
घाटी पर
सरियों से लदा हाथ ठेला
अपनी पूरी ताकत झोंक दी है
पसीने से लथपथ
उस ठेलेवाले ने
एक होड़ जारी है
भीतर के लोहे की
बाहर के लोहे के साथ
देखो
पसीना बह रहा है
झरने की तरह ।

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